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Monday, 26 December 2016

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एक ऐसा मुसलमान जो पीएम मोदी के लिए बर्बाद तक हो गया लेकिन नहीं छोड़ा साथ, जानिए...

एक मुस्लिम बिजनेसमैन सारी आलोचनाओं की परवाह किए बिना लंबे समय से पीएम मोदी के साथ जुड़ा है। दोनों की यह नजदीकी गुजरात दंगों के दौर की है और आज तक कायम है। इनका नाम जफर सरेशवाला है।


2002 में हुए देंगों के बाद देश ही क्या विदेश में भी मोदी की आलोचना हो रही थी। खासकर मुसलमानों ने ज्यादा आलोचना की। लेकिन इस दौरान यह मुस्लिम चेहरा मोदी के कंधे से कंधा मिलाकर चला, और बिना किसी की परवाह किए डटा रहा।

जफर सरेशवाला एक गुजराती मुसलमान हैं और वह अहमदाबाद से हैं। वह मुस्लिमों के बोहरा समुदाय से ताल्‍लुक रखते हैं, जो भारत में हजारों सालों से कारोबार से जुड़ा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनका परिवार करीब 300 सालों से इस शहर में रहता आया है। मौजूदा समय में वह ट्रेवेल और फाइनेंशियल सर्विस के कारोबार से जुड़े हैं। उनकी कंपनी का नाम पारसोली कॉर्प है, जो भारत में इस्‍लामिक बैंकिंग की बड़ी संस्‍थाओं में से एक है।

कंपनी का बिजनेस भारत के अलावा ब्रिटेन में भी फैला हुआ है। मोदी सरकार के सत्‍ता में आने के बाद उन्‍हें मौलाना आजाद नेशनल ऊर्दू यूनिवर्सिटी का चांसलर बनाया गया है।

जफर ने गुजरात में मुस्लिम कारोबारियों के लिए कई कार्यक्रम आयोजित कराए, उसमें मोदी गुजरात के सीएम के तौर पर शिरकत करते रहे। पीएम बनने से पहले फरवरी 2014 में अहमदाबाद में जफर की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भी मोदी ने शिकरत की थी। यही नहीं जफर सरेशवाला की पत्‍नी के इस्‍लामिक आर्ट वर्क की प्रदर्शनी में भी मोदी का देखा जा चुका है।

सरेशवाला 2002 से पीएम मोदी के साथ हैं। गुजरात दंगों के बाद जब कई देशों ने पीएम मोदी पर कई तरह के बैन लगाए तो भी जफर देसी और विदेशी मीडिया में उनकी तरफदारी करते रहे। इसके चलते उन्‍हें कई बार बड़े मुस्लिम संगठनों के मंचों पर विरोध का भी सामना करना पड़ा है। जयपुर में हुई ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में उन्‍हें प्रवेश तक नहीं करने दिया गया।

2002 के गुजरात दंगों के दौरान दंगाईयो ने उनके घर और आफिस सबको तबाह कर दिया था। भारत में इस्‍लामिक बैंकिंग का सबसे बड़ा नाम मानी जाने वाली उनकी कंप‍नी के आफिस को आग के हवाले कर दिया गया। सारा स्‍टाफ ऑफिस छोड़कर भाग गया, कंप्यूटर से लेकर फर्नीचर तक कुछ नहीं बचा। जफर के अनुसार उस दंगों में उन्हें 3.5 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। यही नहीं 1669, 1985 और 1992 के दंगों में भी परिवार को ऐसी ही नुकसान का सामना करना पड़ा था

जफर कहते हैं कि दंगों के बाद उनका परिवार सड़क पर आ चुका था। उनके पास दो ही चारा था। या तो वह वापस ब्रिटेन चले जाते या फिर यहीं रहकर फिर से खुद को स्‍टैबलिश करते। जफर ने भारत में ठहरने का फैसला किया और दंगो में खत्‍म हुए अपने बिजनेस को फिर से खड़ा किया। साथ ही जिस शख्‍स को दंगों का सबसे बड़ा आरोपी बताया गया उसी के नजदीकी बन गए।

2002 के दंगों में वह ब्रिटेन में एक मेकैनिकल इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे थे। भारत में उनके दो छोटे भाई परिवार का इस्‍लामिक बैंकिंग का काम देखते थे। दंगों में परिवार का जब सबकुछ बर्बाद हुआ तो मोदी के विरोधी हो गए। वह उस संगठन से जुड़ गए जो मोदी के खिलाफ अंतरराष्‍ट्रीय न्‍यायालय में मुकदमा दायर करने जा रहा था।

सरेशवाला ब्रिटेन में रहते हुए मोदी के खिलाफ अभियान चला रहे थे। लेकिन मोदी की एक फोन कॉल ने सरेशवाला की पूरी सोच को बदलकर रख दिया। वह पूरी तरह से ब्रिटेन में बसने की सोच रहे थे, लेकिन मोदी ने सरेशवाला से अपने फैसले पर फिर से सोचने के लिए कहा। मोदी ने कहा, क्‍या वहां तुम अंग्रेजों की गुलामी ही करते रहोगे, भारत को तुम्‍हारी जरूरत है। उसके बाद वह भारत आए तब से उन्‍हें मोदी का बेहद खास मुसलमान माना जाता है।


पीएम मोदी से नजदीकी पर पूछे गए सवाल के जवाब में जफर सरेशवाला का हमेशा साफ नजरिया रहा है। वह कहते हैं कि मुस्लिम एक ऐसी पार्टी से खुद को दूर नहीं रख सकते जो लंबे समय से गुजरात में सत्‍ता मे हो और साथ ही मोदी भी हमेशा उनके लिए अछूत नहीं रह सकते। एक रानीतिक दल और उनके पीएम पद के उम्‍मीदवार से स्‍थायी दुश्‍मनी मुस्लिम समुदाय के हालात बेहतर करने में मदद नहीं कर सकती है। 

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