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Monday, 3 October 2016

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भले हमारी मुलाकात 4 महीने में होती है, लेकिन मुझे आर्मी ऑफिसर की वाइफ होने पर गर्व है’

जब हम सुकून के साथ अपने घर में सो रहे होते हैं, ठीक उसी समय देश का कोई जवान कंधे पर बंदूक लेकर सीमा पर रखवाली कर रहा होता है. उस सिपाही को ये नहीं पता होता है कि आने वाला पल कैसा होगा? दुश्मन कब हमला कर दे, ये किसी को पता नहीं है. मौत और ज़िंदगी के बीच एक अनोखा रिश्ता लेकर चलते हैं वे. सीमा सुरक्षा के लिए इनकी जान भी चली जाए, तो इन्हें कोई परवाह नहीं होती है.


हालांकि, इन जवानों के भी परिवार होते हैं, मगर देश सेवा के सामने सब कुछ नगण्य है. देश सेवा में जितना एक फौजी तत्पर रहता है, उससे कहीं ज़्यादा उसकी पत्नी का समर्पण होता है. एक फौजी की पत्नी मजबूत इरादों वाली हिम्मती महिला होती है. इसी मुद्दे पर एक फौजी की पत्नी ने अपना अनुभव शेयर किया है, जिसे पढ़ने के बाद आपकी आंखें नम हो जाएंगी.

Humans of Bombay नाम के फ़ेसबुक पेज पर एक आर्मी अफ़सर की पत्नी ने अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा है कि आप भले ना विश्वास करें, मगर हमारी बात पत्रों के ज़रिए होती है. 2002 में सेल फोन आने के बावजूद भी हमारा संपर्क नहीं हो पाता है. हम सिर्फ़ और सिर्फ़ पत्राचार पर आश्रित हैं. शादी के बाद मैं बठिंडा आकर वकालत करने लगी. हालांकि एक प्रोफेशन के तौर पर मैं जानती थी कि हर जगह रहना मुश्किल होता है.

अंत में हम दोनों ने निर्णय लिया कि मैं मुंबई में अपने करियर पर ध्यान दूंगी और वो अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे. यह बहुत ही बड़ा निर्णय था. हमारी बातचीत लंबे ख़त में होने लगी, जो समय के साथ Whatsapp के Conversation में तब्दील हो गई.

‘4 महीनों में हमारी मुलाकात होती है. इतने समय में हमारी तीन साल की एक बेटी भी है. भले हम साथ में कम समय बिताते हैं, मगर एक बात कहना चाहती हूं कि इंडियन आर्मी का कोई सानी नहीं. देश की सेवा में सदैव तत्पर रहने वाले ये जवान हमारी देश की शान हैं.


वो कहती हैं कि यहां हम बोनस, पेंशन और छुट्टी के लिए रोते रहते हैं, मगर देश के सिपाही को इन सब चीज़ों से कोई मतलब नहीं है. उन्हें हमेशा इस बात की चिंता रहती है कि कोई दुश्मन सीमा के अंदर दाखिल तो नहीं हो रहा है!
source by justafuture

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