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Friday, 14 October 2016

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BIG-NEWS: पाकिस्तान में लड़कियों को लगी जानलेवा बीमारी, अबतक हुई...

पाकिस्तान में महिलाओं के साथ जो हो रहा है। उसे जान आपकी रूह कांप उठेगी। एक तरफ पाकिस्तान की सरकार भारत पर हमले की साजिश कर रही है। तो वहीं उसके मुल्क में लड़कियां एक बीमारी से मर रही हैं।


आपको बता दें कि महिलाओं के मासिक धर्म या स्तन सहित शरीर के किसी भी अंग की बात होती है, युवा लड़के हंसते हैं और कई बार उनका मजाक भी बनाते हैं। वयस्कों के रूप में हमें जरूरत है कि हम अपने बच्चों को इसके बारे में पूरी संवेदनशीलता से बताएं।

पाकिस्तान की एक महिला फामा हसन ने सातवीं या आठवीं के बच्चों को 'स्तन कैंसर' के बारे में बात करते हुए सुना। वे लड़के इसके बारे में मजाक कर रहे थे। इसके बाद उसने इसके बारे में फेसबुक पर जो लिखा, अब वह वायरल हो रहा है। आप भी पढ़िए क्या लिखा फामा ने कल मैं क्लास से बाहर निकली और फाटक की ओर अपनी कार की तरफ जा रही थी।

उस वक्त मैंने 7वीं या 8वीं कक्षा के बच्चों को बातचीत करते हुए सुना। पहला लड़का ने कहा कि ' ओए वो क्या कह रहे थे? तो दूसरा लड़का बोला बोला 'पता नी यारा, 'स्तन कैंसर' का कुछ करने आए थे। उसी के बारे में बताया जा रहा था। इसके बाद उन्होंने आपस में अश्लील बातें की। तो तीसरा लड़का आंय ! बोला फिर तीनों ठहाके लगाने लगे।

शर्मिंदगी महसूस करती रही हूं

यूनिवर्सिटी से घर आने तक मैं पूरे रास्ते शर्मिंदगी महसूस करती रही। अब जबकि मैं यह लिख रही हूं, तो भी शर्मिंदगी महसूस करती रही हूं। हम एक ऐसे समाज में रह रहे हैं, जहां बुनियादी मानव अंगों को इस हद तक सेक्सुअलाइज कर दिया गया है कि कैंसर जैसी बीमारी में भी मजाक बनाया जा रहा है।

कम ही लोग जानते हैं कि अकेले पाकिस्तान में इस बीमारी के कारण 40,000 से अधिक महिलाओं की हर साल मौत हो जाती है। वे लोग बेहद भाग्यशाली हैं, जिनको समय से इसकी रिपोर्ट मिल पाती है। कम ही लोग जानते हैं कि एशिया में स्तन कैंसर की सबसे ज्यादा मामले पाकिस्तान में सामने आते हैं।

यह वास्तव में इस सामाजिक व्यवस्था की वजह से है, जिसमें महिलाएं चिकित्सा जांच कराने में अनिच्छुक रहती हैं और अपनी समस्या के बारे में परिवार से सदस्यों तक से बात नहीं करती हैं। अंत में वे मर जाती हैं क्योंकि जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

समाज को अपनी सोच बदलनी पड़ेगी

लोग अक्सर मुझसे कहते हैं कि अगर आप इसका समर्थन करती हैं, तो कुछ करें, बैठकर बातें करने से कुछ नहीं होगा। आप सभी को यह समझना होगा कि कुछ करने से पहले बैठ कर बात करना और जागरूकता फैलाना जरूरी है। क्योंकि जब कोई संगठन कुछ करने के लिए हमारे संस्थानों में आते हैं, तो उनका सामना इन अनपढ़ बेवकूफों से होता है। तो आप जो कर सकते हैं करें।

बातें करें, चीखें क्योंकि कहीं बैठा हुआ कोई उसे सुन रहा होगा। आप जो कुछ भी कर सकते हैं, करें। सब कुछ मायने रखता है। और उन चार लड़कों के लिए, मैं जिनके सामने से निकली थी, खुद को शिक्षित करो और अपने आस-पास मौजूद लोगों को शिक्षित करो।


इसके लिए समाज को अपनी सोच बदलनी पड़ेगी। ताकि महिलाए भी समाज मे अपनी समस्याओं को खुलकर बता सकें।

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