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Thursday, 22 September 2016

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वार रूम मीटिंग के बाद एक्शन में PM मोदी, पाकिस्तान के खिलाफ़ लिया ये बड़ा फेसला... जानिए!

भारत ने अब पाकिस्तान को बिना युद्ध के घुटने टेकने पर मजबूर करने का प्लान तैयार कर लिया है। सरकार ने उस समझौते को तोड़ने के साफ संदेश दे दिए हैं जिसके दम पर पाकिस्तान की 80 फीसदी जनता जिंदा है।

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता तोड़ने की बात कही है। दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते के लिए दो देशों में आपसी विश्वास और सहयोग बहुत जरूरी है, यह एक तरफा नहीं हो सकता। उरी हमले के बाद की जा रही कार्रवाई को लेकर स्वरूप ने कहा कि हमारा काम खुद बोलता है और उसके नतीजे अभी से मिलने शुरू हो गए हैं। 

संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाषण को लेकर विकास स्वरूप ने पाकिस्तान को जमकर कोसा। स्वरूप ने कहा कि ब्रिटेन, फ्रांस, सऊदी अरब सहित दुनिया के ज्यादातर देशों ने उरी हमले की कड़ी निंदा की है और अब यह पूरी तरह पाकिस्तान की जिम्मेदारी है कि वह अपने देश में फल फूल रहे आंतकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करे। विकास स्वरूप ने कहा कि अन्य किसी देश ने कश्मीर मुद्दे पर कुछ नहीं कहा पर नवाज शरीफ ने अपने भाषण का 80 फीसदी हिस्सा इसी पर केंद्रित रखा। 

उन्होंने कहा कि अन्य सभी देशों ने अपने बयान में आतंकवाद को शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है लेकिन पाकिस्तान अब भी यह मानने को तैयार नहीं। नवाज शरीफ ने अपने भाषण में कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा किए जा रहे मानवाधिकार के कथित उल्लंघनों से जुड़ा डोजियर सौंपने की बात कही थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विकास स्वरूप ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव के बयान में हमें इसका कोई जिक्र नहीं मिला। हमें डोजियर देने की कोई जरूरत नहीं, पूरी दुनिया जानती है कि आतंकवाद को बढ़ावा देने में पाकिस्तान की क्या भूमिका है।


सिंधु नदी संधि आधुनिक विश्व के इतिहास का सबसे उदार जल बंटवारा है। इसके तहत पाकिस्तान को 80.52 फीसदी पानी यानी 167.2 अरब घन मीटर पानी सालाना दिया जाता है। नदी की ऊपरी धारा के बंटवारे में उदारता की ऐसी मिसाल दुनिया की किसी और संधि में नहीं मिलेगी। दरअसल सिंधु समझौते के तहत उत्तर और दक्षिण को बांटने वाली एक रेखा तय की गई है, जिसके तहत सिंधु क्षेत्र में आने वाली तीन नदियां पूरी-की-पूरी पाकिस्तान को भेंट के तौर पर दे दी गई हैं और भारत की संप्रभुता दक्षिण की ओर तीनों नदियों के बचे हुए हिस्से में ही सीमित रह गई है।

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