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Tuesday, 21 June 2016

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NSG में भारत की एंट्री को लेकर अमरीका ने कहा, भारत को करें सपोर्ट!

अमेरिका ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप के मेंबर्स से भारत के दावे को सपोर्ट करने के लिए कहा है। सियोल में बुधवार को एनएसजी की मीटिंग होनी है। अमेरिका की ओर से ये कमेंट चीन के उस बयान के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि मीटिंग में भारत की मेंबरशिप को लेकर कोई एजेंडा ही नहीं है। चीन शुरू से ही NSG में भारत की मेंबरशिप का विरोध कर रहा है। 

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अमेरिका ने कहाँ भारत को करे सपोर्ट-

व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेट्ररी जॉश अर्नेस्ट ने डेली न्यूज कॉन्फ्रेंस में कहा, ''हमारा मानना है कि भारत मेंबरशिप के लिए तैयार है।''

अमेरिका की अपील है कि इस हफ्ते होने वाली एनएसजी मीटिंग में मेंबर कंट्रीज भारत की एप्लीकेशन का सपोर्ट करें।

अर्नेस्ट ने कहा कि कई बार ग्रुप के मेंबर्स को ऐसी किसी भी एप्लीकेशन पर आम सहमति से फैसले लेने की जरूरत होगी।

अमेरिका ने  कहा कि वो, '' निश्चित तौर पर भारत की मेंबरशिप की वकालत करेगा।''

अमेरिका ने अपने विचार निजी तौर पर और सार्वजनिक तौर पर जता दिए हैं।

एक अलग न्यूज कॉन्फ्रेंस में स्टेट डिपार्टमेंट के स्पोक्सपर्सन जॉन किर्बी ने भी यही बात दोहराई।

आपको बता दे कि, इसी महीने हुए मोदी के यूएस दौरे के वक्त ओबामा ने भारत की मेंबरशिप की एप्लीकेशन का वेलकम किया था।

चीन ने कहाँ भारत एनएसजी मेंबरशिप एजेंडा में शामिल नहीं :-

चीन ने कहा था कि इस हफ्ते के आखिरी में सियोल की माटिंग में भारत को एनएसजी मेंबरशिप देने का कोई एजेंडा शामिल नहीं है।

सोमवार को चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री की स्पोक्सपर्सन हुआ चुइंग ने ये बयान दिया।

शुरू से ही चीन एनएसजी में भारत की एंट्री का विरोध कर रहा है।

इसमें चीन का कहना है कि बिना न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफिरेशन ट्रीटी (NPT) पर साइन किए किसी को भी 48 देशों वाले इस ग्रुप में एंट्री नहीं दे सकते।

चीन ने कहा, ''एनएसजी मेंबर अब भी डिवाइडेड हैं। अभी किसी देश की एंट्री को लेकर बात करने का सही समय नहीं है।

दरअसल कुछ दिनों के भीतर अमेरिका के साथ ही मेक्सिको, रूस और ब्रिटेन समेत कई देश भारत को मेंबरशिप दिए जाने का सपोर्ट कर चुके हैं।

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