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Thursday, 9 June 2016

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भारत का भी होगा अपना GPS सिस्टम, IRNSS-1G का सफल प्रक्षेपण!

भारत के सातवें और अंतिम नेविगेशनल सेटेलाइट को लॉन्च कर इसरो ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में गुरुवार को बड़ी कामयाबी हासिल की। श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी- सी33 से IRNSS-1G को लॉन्च किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस मिशन पर नजर बनाए हुए थे। इसी के साथ भारत अमेरिका और रूस की कतार में शामिल हो गया।

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प्रधानमंत्री ने भारतीय वैज्ञानिकों को IRNSS-1G की लॉन्च‍िंग पर बधाई दी। इसी के साथ भारत ने स्वदेशी जीपीएस बनाने की मंजिल तय कर ली। अमेरिका आधारित ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी जीपीएस जैसी क्षमता हासिल करने की दिशा में आखिरी कदम बढ़ाते हुए इसरो ने गुरुवार को यह सैटेलाइट लॉन्च किया।

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कहा, 'अब हमारे रास्ते हम तय करेंगे। कैसे जाना है, कैसे पहुंचना है, ये हमारी अपनी तकनीक के माध्यम से होगा।'

करीब 20 मिनट की उड़ान में पीएसएलवी- सी33 ने 1,425 किलोग्राम वजनी आईआरएनएसएस-1जी उपग्रह 497.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर कक्षा में स्थापित किया। पीएसएलवी ठोस और तरल ईंधन द्वारा संचालित चार चरणों/इंजन वाला प्रक्षेपण यान है। यह सैटेलाइट आईआरएनएसएस-1जी (भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली-1जी) के सात उपग्रहों के समूह का हिस्सा है।

आईआरएनएसएस-1जी सैटेलाइट उपयोगकर्ताओं के लिए 1,500 किलोमीटर तक के विस्तार में देश और इस क्षेत्र की स्थिति की सटीक जानकारी देगा। अब तक भारत के द्वारा छह क्षेत्रीय नौवहन उपग्रहों (आईआरएनएसएस -1 ए, 1बी, 1सी, आईडी, 1ए और 1जी) का प्रक्षेपण किया जा चुका है।

बताया जा रहा है कि इस ओर हर सैटेलाइट की लागत 150 करोड़ रुपये के करीब है, वहीं पीएसएलवी-एक्सएल प्रक्षेपण यान की लागत 130 करोड़ रुपये के लगभग है। इस तरह सातों प्रक्षेपण यानों की कुल लागत करीब 910 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

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